फेफड़े के रोग – जाने लक्षण

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    फेफड़े हमारे शरीर के मुख्य अंग होते हैं जो हमारे शरीर में अहम रोल अदा करते हैं, क्योंकि जीवित रहने के लिए सांस लेना बहुत हो जरूरी होता है और सांस लेने के लिए हमारे फेफड़ों का सेहतमंद होना बहुत ही जरूरी है, लेकिन दूषित वातावरण के साथ साथ दूषित खाना भी हमारे फेफड़ों का दुश्मन बना हुआ है। इसके साथ ही जब हम धूम्रपान करते हैं, तो उस धुएं का सीधा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है। यह जरूरी नहीं जो धूम्रपान करें उसके फेफड़े खराब होते हैं, जो धूम्रपान कर रहे व्यक्ति के पास खड़ा होता है उसके भी फेफड़े धुम्रपान के कारण खराब हो जाते हैं। जिसके कारण हमें बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।

    हमारे फेफड़ों को कई तरह के रोगों का सामना करना पड़ता है जैसे कि…

    • फेफड़ों में पानी भरना
    • फेफड़ों में सूजन आना
    • दमा
    • फेफड़ों में कैंसर
    • ब्रोंकाइटिस
    • टीबी का रोग

    फेफड़ों में पानी
    फेफड़े हमारे शरीर के वो अंग होते हैं, जिसके कारण हम आसानी से सांस ले सकते हैं और जीवित रह सकते हैं, लेकिन कई बार हमारे फेफड़ों में पानी भर जाता है और हमें बुखार हो जाता है। तब हमारी साँसे रुक-रुक कर आती है।

    फेफड़ों में सूजन
    जब भी धुम्रपान करते हैं, तो उस धुंए का असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है जिसके कारण हमारे फेफड़ों में सूजन आना शुरू हो जाती है और हमें अत्यधिक दर्द सहना पड़ता है। इसके अलावा जब हम दूषित वातावरण में रहते हैं या फिर बाहर के दूषित खाने का सेवन करते हैं तो इससे हमारे फेफड़ों में सूजन पैदा होने लगती है।

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    दमा
    जब भी व्यक्ति की सूक्ष्म नलियों में किसी प्रकार का कोई रोग पैदा हो जाता है, तो अक्सर उसे साँस लेने में दिक्कत होने लगती है और हमें खांसी की शिकायत हो जाती है, जिसे हम दमा कहते हैं। दमा एक ऐसा रोग है जिसमें साँस लेने और छोड़ने पर बहुत ही कठिनाई होती है, ऐसे में फेफड़ों तक वायु की पूरी खुराक नहीं पहुंच पाती। जिसके कारण रोगी को पूरी श्वास लिए बिना ही अपनी श्वास छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है। जो भी दमा से पीड़ित रोगी होते हैं, उसकी आवाज से सिटी बजने की आवाज सुनाई देती है। दमा से पीड़ित लोगों के चेहरा ऑक्सीजन के अभाव के कारण पीला पड़ जाता है। जब भी दमा से पीड़ित रोगियों को खांसी होती है, तो वो सुखी खांसी होती है जितना भी वो चाहे बलगम निकलने की कोशिश करें, बलगम बाहर नहीं निकलती।
    फेफड़ों में कैंसर
    फेफड़ों का काम होता है हवा से ऑक्सीजन को अलग करके रक्त में पहुंचना। हमारे शरीर से कार्बन डाई- ऑक्साइड पैदा होती है, जो फेफड़ों के द्वारा शरीर से बाहर निकल जाती है। लेकिन कई बार हमारे फेफड़ों में संक्रमण होने लगता है जिसके कारण हमारे फेफड़े सही से काम नहीं करते। जब यह समस्या बढ़ने लगती है तो यह कैंसर का रूप धारण कर लेती है।

    ब्रोंकाइटिस
    जीर्ण या पुराना जुकाम को हम ब्रोंकाइटिस के नाम से भी जानते हैं। इस रोग से रोगी की श्वास नली में जलन होने लगती है और कई बार रोगी को तेज बुखार का सामना भी करना पड़ सकता है और यह बुखार 104 डिग्री तक हो सकता है। इस रोग में रोगी को सुखी खांसी, सांस लेने में कष्ट, छाती के बगल में दर्द, गाढ़ा कफ निकलना और आवाज भारी होना और गले से घर्र घर्र की आवाज निकलती है।

    टीबी
    टी.बी का पूरा नाम ट्यूबरकुल बेसिलाइ होता है। यह एक ऐसा रोग है जिसे अगर शुरू में ही न रोका जाये तो यह जानलेवा साबित हो सकता है और यह व्यक्ति को धीरे धीरे से मरता है। ऐसे में जब भी व्यक्ति को तीन सप्ताह से अधिक खांसी हो तो उसे तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

     

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